Fundamental Duties in Indian Constitution in Hindi

भारतीय संविधान के मूल कर्तव्‍य (Fundamental Duties in Indian Constitution) :- नमस्कार मित्रों , आज EexamPaper.com भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण टॉपिक  लेकर आए हुए हैं  जोकि  सभी प्रतियोगी छात्रों के लिए  बहुत ही महत्वपूर्ण है  आज हम अपने इस पोस्ट में  आपको भारतीय संविधान के मूल कर्तव्‍य (Fundamental Duties in Indian Constitution) के संबंध में संपूर्ण जानकारी आपके साथ साझा करेंगे जो कि आपको सभी आने बाले Competitive Exams के लिये बहुत ही उपयोगी साबित होगें।

यह पोस्ट Fundamental Duties in Hindi | Fundamental Duties in Indian Constitution in Hindi हम आपके साथ साझा कर रहे हैं। इसे कृपया आप अच्छे से पढ़ें और Fundamental Duties के बारे में सारी जानकारी को एकत्रित करें। इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपके द्वारा पूछे गए कुछ सवाल जैसे मौलिक कर्तव्य का अर्थ, मूल कर्तव्य की संख्या कितनी है? मूल कर्तव्य किस भाग में है? मूल कर्तव्य कहा से लिया गया? मूल कर्तव्य कहाँ से लिए गए हैं? मूल कर्तव्य किस देश से लिए गए हैं? Fundamental Duties Of India , How many Fundamental Duties? What are Fundamental Duties? आदि सवालों के उत्तर देने का भरपूर प्रयास किया है।

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भारतीय संविधान के मूल कर्तव्‍य (Fundamental Duties in Indian Constitution)

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Fundamental Duties in Indian Constitution

भारतीय संविधान के मूल कर्तव्‍य (Fundamental Duties in Indian Constitution)

मूल अधिकार और मूल कर्तव्य स्पष्ट रूप से एक-दूसरे से संबंधित एवं अविभाज्य होते हैं परंतु, भारत के मूल संविधान में नागरिकों के अधिकार (Right of Citizenship) एवं राज्य के कर्तव्य (Duties of State) ( नीति निदेशक तत्व) को ही स्थान दिया गया था बाद में वर्ष 1976 में नागरिकों के मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) संबंधी प्रावधान को संविधान में जोड़ा गया। वर्ष 2002 में एक अन्य मूल कर्तव्य को इस सूची में जोड़ा गया।

भारतीय संविधान में मूल कर्तव्यों को पूर्व सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रभावित होकर सम्मिलित किया गया है।

प्रमुख लोकतांत्रिक देशों जैसे – अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी आदि के संविधान में नागरिकों के कर्तव्य को सम्मिलित नहीं किया गया है। संभवतः एकमात्र जापानी संविधान में नागरिकों के कर्तव्य को रखा गया है समाजवादी देशों ने अपने नागरिकों के मूल अधिकारों एवं कर्तव्यों को समान महत्व दिया है।

भारतीय संविधान के मूल कर्तव्य से संबंधित समिती और संशोधन

  • वर्ष 1976 में कांग्रेस पार्टी ने सरदार स्वर्ण सिंह समिति का गठन किया जिसे राष्ट्रीय आपातकाल (1975-77) के दौरान मूल कर्तव्य एवं उनकी आवश्यकता संबंधित संस्तुति देने के लिए गठित किया गया था।
  • समिति ने अनुशंसा की, कि संविधान में मूल कर्तव्यों का एक अलग भाग होना चाहिए। केंद्र की कांग्रेस सरकार ने इसे स्वीकार करते हुए 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 को लागू किया।
  • इसके माध्यम से संविधान एक नया भाग – 4 (क) को जोड़ा गया। इसमें भाग में केवल एक अनुच्छेद 51 (क) था, जिसने पहली बार नागरिकों के 10 मूल कर्तव्य का विशेष उल्लेख किया गया।
  • नोट – जबकि स्वर्ण सिंह समिति ने संविधान में 8 मूल कर्तव्य को जोड़े जाने का सुझाव दिया था लेकिन 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा 10 मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया।
  • 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा 6 से 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना प्रत्येक माता-पिता का कर्तव्य निर्धारित किया गया।

वर्तमान में भारतीय संविधान में मूल कर्तव्य की कुल संख्या 11 है

Fundamental Duties in Indian Constitution in Hindi

नागरिकों के लिए भारतीय संविधान में 11 मौलिक कर्तव्य ( 11 Fundamental Duties in Indian Constitution)

  1. संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
  2. स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में सँजोए रखें और उनका पालन करें।
  3. ‌भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्णण रखें।
  4. ‌देश की रक्षा करें और आह्वान किया जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
  5. ‌भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भाईचारे की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग आधारित सभी भेदभाव से परे हो ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है।
  6. हमारी मिश्रित संस्कृत (Composite Culture) की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझें और उसका परिरक्षण करें।
  7. प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्यजीव सम्मिलित हैं, की रक्षा करें और उसका संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखें।
  8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद, ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
  9. सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें।
  10. व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों की सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें, जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न पर उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें।
  11. 6 वर्ष की आयु से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता और उनके संरक्षक जो भी हो, उन्हें शिक्षा के अवसर प्रदान करें। (इस कर्तव्य को संविधान के 86वें संविधान अधिनियम, 2002 की धारा 4 द्वारा जोड़ा गया।)

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मूल कर्तव्यों का क्रियान्वयन

  • 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में जिन कर्तव्य को सम्मिलित किया गया है वह सांविधिक कर्तव्य (Statutory Body) हैं। उन कर्तव्य के अनुपालन में विफल होने पर दंड का आरोपण करने के लिए संसद विधि द्वारा दंड का विधान कर सकती है।
  • मौलिक कर्तव्यों को परमादेश (Mandamus) द्वारा प्रभावी नहीं बनाया जा सकता है। परमादेश एक रिट (Rit) है। जिसे न्यायालय मूल अधिकारों का उल्लंघन होने पर जारी करता है। मौलिक कर्तव्य लोगों पर नैतिक उत्तरदायित्व आरोपित करते हैं प्रशासन इसके लिए उत्तरदायित्व नहीं हो सकता है जबकि रिटें प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध जारी की जाती हैं।

मूल कर्तव्य की विशेषताएं

नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से भारतीय संविधान के मूल कर्तव्यों (Properties of Fundamental Duties in Indian Constitution) की विशेषताओं के संदर्भ में इन सभी बातों को देखा जा सकता है।

  1. मौलिक कर्तव्यों में से कुछ कर्तव्य नैतिक हैं, तो कुछ नागरिक। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रीय गान का आदर करना नागरिक कर्तव्य जबकि स्वतंत्रता संग्राम के उच्च आदर्शों का सम्मान एक नैतिक कर्तव्य है।
  2. ये मूल्य भारतीय परंपरा, पौराणिक कथाओं, धर्म एवं जीवन पद्धतियों से संबंधित हैं।
  3. मूल कर्तव्य केवल नागरिकों के लिए है, ना कि विदेशियों के लिए।
  4. मूल कर्तव्य के उल्लंघन के विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही नहीं है जबकि संसद उपयुक्त विधान द्वारा इनके ग्रैंडक्रियान्वयन के लिए स्वतंत्र है

मूल कर्तव्यों की आलोचना

संविधान के भाग 4 (क) में मूल कर्तव्यों की आलोचना निम्नलिखित आधार पर की जाती है :-

  • मूल कर्तव्यों की सूची पूर्ण नहीं है क्योंकि, इनमें कुछ अन्य कर्तव्य जैसे – कर अदायगी, परिवार नियोजन, मतदान आदि शामिल नहीं है।
  • नोट :- कर अदायगी (Tax Pay) के कत्तर्व्य को स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति मिली थी, परंतु से शामिल नहीं किया गया।
  • कुछ कर्तव्य स्पष्ट एवं बहुअर्थी है, जिसे आम व्यक्ति को समझने में कठिनाई होती है। विभिन्न शब्दों की अलग-अलग व्याख्या हो सकती है। उदाहरण के लिए, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, उच्च आदर्श, सामासिक संस्कृति आदि।
  • आलोचकों का यह तर्क है कि संविधान के भाग – 4 (क) में मूल कर्तव्य को शामिल करने से इनका मूल्यमहत्व कम होता है। उन्हें भाग – 3 के बाद जोड़ा जाना चाहिए था ताकि वे मूल अधिकार के समकक्ष रहते।

मूल कर्तव्यों का महत्व (Importance fo Fundamental Duties in Indian Constitution)

आलोचनाओं के बावजूद मूल कर्तव्यों के महत्व को निम्नलिखित दृष्टिकोण के आधार पर रेखांकित किया जा सकता है :-

  1. मूल कर्तव्य समाज विरोधी एवं राष्ट्र विरोधी गतिविधियों,  जैसे – सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने, राष्ट्रीय ध्वज को जलाने आदि चेतावनी के रूप में कार्य करता है।
  2. नागरिक जब अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं, तब मूल कर्तव्य सचेतक के रूप में सेवा करते हैं। नागरिकों को अपने देश, अपने साथी नागरिकों और अपने समाज के प्रति अपने कर्तव्यों के संबंध में भी जानकारी रखनी चाहिए।
  3. मूल कर्तव्य नागरिकों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो नागरिकों में अनुशासन और प्रतिबद्धता को बढ़ाते हैं।
  4. मूल कर्तव्य, अदालतों को किसी विधि की संवैधानिक वैधता एवं उनकी परिरक्षण के संबंध में सहायक होते हैं।

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नोट :- भारतीय संविधान में इस प्रकार की व्यवस्था की गई है कि, किसी कानून की संवैधानिकता की दृष्टि से व्याख्या में यदि अदालत को यह प्रतीत होता है कि, मूल कर्तव्यों के संबंध में विधि के प्रश्न निहित है तो अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 (6 स्वतंत्रताओं) के संदर्भ में इन्हें तर्कसंगत माना जा सकता है और इस प्रकार ऐसी विधि को असंवैधानिक होने से बचाया जा सकता है।

नोट :- जब भारतीय संविधान में मूल कर्तव्य को जोड़ा जा रहा था तो विपक्ष ने संविधान में कांग्रेस सरकार द्वारा मूल कर्तव्य को जोड़े जाने का संसद में कड़ा विरोध किया परंतु मोरारजी देसाई के नेतृत्व में बनी जनता पार्टी की सरकार ने आपातकाल के बाद इन मूल कर्तव्य को समाप्त नहीं किया।

आशा करता हूं कि हमारे द्वारा दिए गए भारतीय संविधान के 11 मूल कर्तव्य ( Fundamental Duties in Indian Constitution in Hindi ) पर यह पोस्ट आपको अच्छी लगी होगी। Fundamental Duties of India और Fundamental Duties in Indian Constitution के लिए भी यह पोस्ट उचित है जो भी विद्यार्थी हिंदी भाषा को समझ सकते हैं।

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