होली पर निबंध हिंदी में | Best Essay on Holi in Hindi

होली पर निबन्ध हिंदी में | Essay on Holi in Hindi | Holi Essay (होली पर निबंध) :- पूरे भारत देश में होली मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार है होली को भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है इस वर्ष होली का त्यौहार (Holi Festivel) 21 मार्च 2020 को मनाया जाएगा। अगर आपको विद्यालय या कॉलेज में होली पर निबंध (Holi Par Nibandh) लिखना है तो EexamPaper.com द्वारा होली का सर्वोत्तम निबंध  होली पर निबन्ध (Essay on Holi) आपके लिए लाया गया हैं होली कैसे मनाते है, होली का महत्व क्या है, होलिका कौन थी, प्रह्लाद कौन हैं, हिरण्यकश्यप कौन है,  होली क्यों मनाई जाती है, होली कब है, इन सब सवालों का जवाब आपको इस निबंध के माध्यम से मिल जाएगा और होली का निबंध हिंदी में (Holi Essay In Hindi) आपके लिए सबसे अच्छा साबित होगा।

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होली पर निबंध हिंदी में | Best Essay on Holi in Hindi

होली पर निबन्ध हिंदी में बच्चों के लिए | Essay on Holi in Hindi For School | Holi Essay (होली पर निबंध)

होली पर निबंध 400 शब्दों में :-

प्रस्तावना :-

होली बसंत ऋतु में मनाए जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और  नेपाली लोगों त्यौहार है। यह त्यौहार मुख्यता हिंदू धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाता है। होली भारत का अत्यंत प्राचीन पर्व है। होली का त्यौहार  हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

होली का महत्व :-

रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला है पर्व पारंपरिक रूप से 2 दिनों तक मनाया जाता है।पहले दिन होलीका जलाई जाती है जिसे होलीका दहन कहा जाता हैं। दूसरे दिन रंगों की होली खेली जाती है। इस दिन सभी एक दूसरे को रंग तथा गुलाल लगाते हैं। ढोल बजाकर नाच गानों के साथ होली का गीत भी गाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि होली के दिन सभी एक दूसरे को गले मिलते हैं तथा पुरानी कटुता को भूल जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद सभी नहा धोकर नए कपड़े पहन कर शाम को एक दूसरे के घर सबसे मिलने जाते हैं। 

होली का प्राकृतिक उत्सव :-

राग रंग का यह लोकप्रिय  त्यौहार बसंत का संदेशवाहक भी है माना जाता है कि होली के बाद से बसंतऋतु का आगमन हो जाता है। राग अर्थात संगीत और रंग एक दूसरे के प्रमुख अंग है ही पर इनको उत्कर्ष तक पहुंचाने वाली प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे फूलों के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। होली का त्यौहार बसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है इस दिन से फागुन और धमार का गाना शुरू हो जाता है। खेतों में गेहूं की बालियां इठलाने लगती है और सरसों के पीले फूल खिल उठते हैं। बाग – बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा बिछ जाती है। पेड़ – पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं।  बच्चे – बूढ़े सभी ढोल – मजीरा की धुन में नृत्य संगीत व रंगों में डूब जाते हैं।

होली मानने का कारण :-

माना जाता प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। अपने बल के दम पर ही वह अपने आपको ईश्वर मानता था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने  पर  ही पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद  ईश्वर का भक्त था। प्रहलाद की ईश्वरभक्ति से क्रुद्ध हिरणकश्यप ने कई बार प्रहलाद को कठोर दंड किए, परंतु प्रह्लाद ने ईश्वरभक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि उसे आग नहीं जला सकती है। हिरण्यकश्यप ने यह आदेश दिया कि होलिका प्रहलाद को लेकर आग में बैठें। जिसके पश्चात होलीका तो जल गई पर प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ। ईश्वर के भक्त प्रहलाद की याद में इसी दिन से होली का त्यौहार मनाया जाने लगा।

लोकप्रिय पर्व होली :-

होली के दिन घरों में खीर – पूड़ी और विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं। इस त्यौहार पर अनेक मिठाइयां बनाई जाती है।  बेसन के सेव, गुझिया और दही – वड़े तो लगभग हर परिवार में ही बनाए जाते है। कांजी, भांग और ठंडाई इस पर्व विशेष पेय पदार्थ है। भारत में होली का पर्व विभिन्न ने प्रदेश में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है तथा अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे – ब्रज की होली, बरसाने की लठमार होली, वृंदावन में 15 दिन की होली कुमायूं के गीत बैठकी, हरियाणा की धुलेंडी, बंगाल की ढ़ोल यात्रा, महाराष्ट्र की रंगपंचमी, पंजाब का होला मोहल्ला, गोआ का शिमगो, तमिलनाडु की कमन पेडीगई, मणिपुर की याओसांग,  छत्तीसगढ़ की होरी, मध्यप्रदेश के मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में भगोरिया, बिहार का फगुआ आदि।

होली पर समाज में फैलती कुरीतियां :-

किंतु आज यह पर्व घिनौना रूप धारण कर चुका है। इसमें शराब और अन्य नशीले पदार्थों का भरपूर सेवन होने लगा है। राह चलते लोगों पर कीचड़ उछाला जाता है। होली की जलती आग में घरों छप्पर आदि में आग लगा दी जाती है। खेत- खलिहानों के अनाज मवेशियों तक का चारा स्वाह कर देना अब साधारण सी बात हो गई है। रंग के बहाने दुश्मनी निकालना, शराब के नशे में मन की भड़ास निकालना आज आम बात हो गई है।

उपसंहार :-

होली एक सामाजिक पर्व है। परन्तु कुछ कारण है आज समाज में आपसी प्रेम के बदले दुश्मनी पनप रही है। यह जोड़ने वाला त्यौहार मानो को तोड़ने लगा है। होली की इन बुराइयों के सभ्य और समझदार लोग इससे किनारे हो लिये है। रंग और गुलाल से लोग अब भागने लगे है।

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होली पर निबन्ध दस लाइन में | Essay on Holi in 10 Line | Holi Essay (होली पर निबंध) :-

  1. होली का त्यौहार भारतवर्ष में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाने वाला रंगो का त्यौहार है।
  2. यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
  3. इस दिन सभी एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं तथा गले मिलते हैं।
  4. होली का त्यौहार भाईचारे को बढ़ाने का त्यौहार है।
  5. होली के एक दिन पहले होलिका जलाई जाती है इस दिन सभी एक जगह एकत्र होकर होलिका दहन करते हैं।
  6. होली के दिन सभी घरों में मिठाईयां बनती है और अनेक प्रकार के पकवान भी बनते हैं।
  7. होली में हमें हानिकारक केमिकल वाले रंगों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  8. होली के दिन कुछ कुरीतियां फैलती जा रही है जैसे लोग शराब और भांग पीते हैं।
  9. होली के दिन बच्चे – बूढ़े सभी ढोल – मजीरा की धुन में नृत्य संगीत व रंगों में डूब जाते हैं।
  10. होली एक लोकप्रिय त्यौहार है इस उत्सव को हमें मित्रतापूर्वक मनाना चाहिए किसी से लड़ाई – झगड़ा नही करना चाहिए।

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