रुधिर और लसीका में अंतर

रुधिर और लसीका में अंतर – आज आपके लिये EexamPaper.com विज्ञान के अंतर्गत आने वाले विषय जीव विज्ञान का एक महत्वपूर्ण टॉपिक रुधिर और लसीका में अंतर लेकर आये हैं। आशा करता हूँ यह पोस्ट रुधिर और लसीका में अंतर को समझने के लिए अतिमहत्वपूर्ण साबित होगा।

रुधिर और लसीका में अंतर को जानने से पहले हमें यह समझना पड़ेगा कि रुधिर किसे कहते है? लसीका किसे कहते है? रुधिर केे क्या कार्य है?लसीका के क्या कार्य है?

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रुधिर और लसीका में अंतर

रुधिर किसे कहते हैं ? अर्थ, परिभाषा तथा कार्य।

रुधिर की परिभाषा :-

रुधिर एक तरल संयोजी उत्तक है , रूधिर में प्लाज्मा एवं रुधिर कोशिकाएँ होती है । मनुष्य में सामान्यत: रुधिर का आयतन 5 लीटर होता है । जिसके दो भाग है द्रव भाग, जिसे प्लाज़्मा कहते हैं और ठोस भाग, जो कोशिकाओं का बना होता है। रुधिर कोशिकाएँ तीन प्रकार की होती हैं : लाल रुधिर कोशिकाएँ, श्वेत रुधिर कोशिकाएँ और विंबाणु। प्लाज्मा में 91 से 92 प्रतिशत जल और शेष में सोडियम, पोटैशियम और कैल्सियम, वसा, शर्करा, प्रोटीन आदि होते हैं।

रुधिर के कार्य :-

  • फुफ्फुसों से शरीर के विभिन्न अंगों, को ऑक्सीजन ले जाना और वहाँ से कार्बन डाइऑक्साइड गैस को फुफ्फुसों तक वापस ले आना रुधिर के कार्य है।
  • शरीर के चयापचयजन्य अंत्य पदार्थों को वृक्क में पहुँचाना, जिनको वृक्क बाहर रुधिर के माध्यम से विसर्जित कर देते हैं।
  • रूधिर की सहायता से पोषक पदार्थों, ओषधि, विटामिन आदि को शरीर के सब भागों में पहुँचा।
  • शरीर में लवण और क्षार का संतुलन बनाए रखना रुधिर का कार्य है।
  • रोगोत्पादक जीवाणुओं का नाश कर इनसे शरीर की रक्षा रुधिर करता है। श्वेत रुधिर कोशिकाएँ ऐसे जीवाणुओं का भक्षण कर लेती हैं।
  • रुधिर के शीघ्रता से जमकर थक्का बनने की प्रवृत्ति से चोट लगने पर शरीर से रुधिर स्राव को बंद करना।

इन्हें भी देखें :-

लसीका किसे कहते हैं ? अर्थ, परिभाषा तथा कार्य।

लसीका के परिभाषा :-

जब रुधिर केशिकाओं से होकर की ओर बहता है तब उसका द्रव भाग (रुधिर रस) कुछ भौतिक क्रिया, रासायनिक प्रतिक्रिया या शारीरिक प्रतिक्रिया के कारण केशिकाओं की पतली दीवारों के माध्यम से छनकर बाहर आ जाता है। बाहर निकला हुआ यही रुधिर रस लसीका (Lymph) कहलाता है। यह वास्तव में रुधिर ही है, जिसमें केवल रुधिरकणों का अभाव रहता है। लसीका रक्त में से ऑक्सीजन लेकर शरीर के तन्तुओं को पहुँचाता है और उनमें उपस्थित कार्बन-डाई-ऑक्साइड को बाहर निकालने में मदद करता है। इस प्रकार लसीका-वाहिनियों द्वारा शरीर के तन्तुओं का पोषण होता है।

लसीका के कार्य :-

  • केशिका के धमनी सिरे पर रक्त से तरल पारस्रुत (transudate) होता है। इसका अधिकतर जलीय अंश शिरा के सिरे पर पुन: अवशोषित हो जाता है, पर प्रोटीन लसीका में चले जाते हैं। लसीका केशिका इस कारण विशेष वाहिका है जहाँ से प्रोटीन लौटाया जाता है।
  • निर्वाहिका (portal) क्षेत्र में शिराओं में चापवृद्धि, जो निर्वाहिका शिरा, या यकृतशिराओं को अवरुद्ध करके की जा सकती है, उदरांग ऊतकों में निस्यंदन की वृद्धि और लसीका महावाहिनी में प्रवाहित लसीका के आयतन में भारी वृद्धि करती है।
  • लसीका वसा का परिवहन  करता है।  वसा का परिवहन लसीका के द्वारा ही होता है। आहारनाल में वसा के पाचन के पश्चात वसा अम्ल एवं ग्लिसरॉल रुधिर वाहिनियों में न जाकर लैक्टीयल में आते हैं और वहाँ से लसीका तंत्र में पहुंच जाता है।
  • लसीका संक्रमण से सुरक्षा  करता है। लसीका में मौजूद लिम्फोसाइट्स रोगाणुओं को नष्ट कर संक्रमण से मनुष्य की सुरक्षा करते हैं।
  • जल का अस्थायी संचय  लसीका के द्वारा किया जाता हैं । शरीर में प्रवेश करने वाले जल के लिए लसीका वाहिनियाँ अस्थायी आशय (Reservoir) का कार्य करती हैं।
  • अधिशेष जल का अवशोषण  भी लसीका की सहायता से होता है। ऊतक द्रव से जल की अधिशेष मात्रा को हटाकर लसीका उसे रुधिर परिसंचरण में डालती है।
  • दीर्घाणुओं का परिवहन भी लसीका के माध्यम से होता है। लसीका द्वारा बड़े-बड़े अणुओं जैसे-प्रोटीन, हार्मोन आदि को रुधिर परिसंचरण में ले जाकर डाला जाता है क्योंकि ये अणु रुधिर केशिकाओं की भितियों को नहीं भेद पाते। अतः ये अणु सीधे रुधिर परिसंचरण में नहीं पहुँच पाते।

रुधिर और लसीका में अंतर (Difference Between Blood And Lymphatic)

रुधिरलसीका
रुधिर रंगहीन नही होता है। इसका रंग लाल होता है।लसीका रंगहीन होता है। इसका कोई रंग नही होता है।
रुधिर में लाल रुधिर कणिकाएँ की संख्या अधिक मात्रा में होती है।लसीका में लाल रुधिर कणिकाएँ की संख्या की मात्रा कम होती है।
रुधिर में श्वेत रुधिर कणिकाएँ की संख्या की मात्रा कम होती है।लसीका में श्वेत रुधिर कणिकाएँ अधिक संख्या में पाई जाती हैं।
रुधिर में फाइब्रिनोजेन की मात्रा अधिक पाई जाती है जिससे यह बहुत ही आसानी के साथ थक्का बन जाता है ।लसीका में फाइब्रिनोजेन की मात्रा कम उपस्थित होती है फिर भी थक्का जमने की शक्ति इसमें विद्यमान होती है।
रुधिर में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती हैलसीका में प्रोटीन की मात्रा कम होती हैं।

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